मशहूर वैज्ञानिक और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखकर जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट पर गंभीर चिंता जाहिर की है। वांगचुक ने इस पत्र में भारत को जलवायु परिवर्तन से निपटने में अहम भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने विशेष रूप से हिमालय के ग्लेशियरों और देश की नदियों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में नदियां पूरी तरह सूख सकती हैं।
वांगचुक ने पत्र में उल्लेख किया कि अगर ग्लेशियरों को बहाल करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दशकों में महाकुंभ जैसे धार्मिक आयोजनों को रेत पर आयोजित करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि हिमालय के ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहे हैं और अगर यही सिलसिला जारी रहा, तो गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी नदियां भी मौसमी नदियां बन सकती हैं। वांगचुक ने चेतावनी दी कि अगर इस स्थिति को नजरअंदाज किया गया, तो भविष्य में इन नदियों के रेतीले अवशेषों पर ही बड़े धार्मिक आयोजन किए जा सकते हैं।
वांगचुक ने यह भी बताया कि उन्होंने हाल ही में खारटुंगला के एक ग्लेशियर से बर्फ का एक टुकड़ा लेकर लद्दाख, दिल्ली और अमेरिका यात्रा की थी, जिसे विशेष तरीके से इन्सुलेट किया गया था। वांगचुक ने कहा कि हिमालय के ग्लेशियरों के संरक्षण के लिए भारत को वैश्विक नेतृत्व का उदाहरण पेश करना चाहिए, खासकर इस क्षेत्र में सबसे अधिक ग्लेशियरों के होने के कारण।
वांगचुक की यह अपील इस बात की ओर इशारा करती है कि अगर हम अब भी नहीं जागे, तो आने वाले समय में भारत की नदियों की हालत बहुत ही गंभीर हो सकती है, जिससे जलवायु संकट और अधिक बढ़ सकता है।